कुर्मियों की बातें : कच्चे धागे से काल को बांध लेते हैं महेश बाबा
Mon, Dec 1, 2025
राजेश पटेल, जमालपुर/मिर्जापुर।
यदि आपके घर में या किसी ऐसे स्थान पर सांप दिखाई दे तो उसे मारें नहीं। मिर्जापुर जनपद के जमालपुर ब्लॉक में डोहरी गांव निवासी महेश सिंह बाबा को मोबाइल पर काल करें, वे कुछ ही देर में आपके पास पहुंचेंगे और काल रूपी विषैले सांप को देखते ही देखते काबू में कर लेंगे।
महेश सिंह बाबा की उम्र करीब 60 वर्ष है। वह सांप पकड़ने के मामले में बेजोड़ जादूगर के रूप में जाने जाते हैं। कही भी किसी को अगर जहरीला सांप ब्लैक कोबरा, गेहूअन नाग नागिन, करैत अगर दिखाई पड़ जाए और इसकी सूचना महेश बाबा को मिल जाए तो महेश बाबा तुरंत अपना घर-बार छोड़कर सांप पकड़ने उस स्थान पर पहुंच जाते हैं।
बताया जाता है कि महेश बाबा को जब सांप दिखाई देने की जानकारी मिलती है तो सांप उसी स्थान पर स्थिर हो जाता है। महेश बाबा सांप पकड़ने के दौरान कोई मंत्र भी नहीं पढ़ते हैं। पकड़ने के दौरान एक बांस की पतली छड़ी और कच्चा सूत का प्रयोग करते हैं। उसी से बेहिचक पकड़ कर एक हांडी में पकड़ कर नौगढ़ के जंगल में छोड़ देते हैं। इनके करतब को चन्दौली जनपद के वन विभाग के उच्च अधिकारियों सहित चन्दौली, सोनभद्र और मिर्जापुर जनपद के लोग भी देख चुके हैं।
आश्चर्यजनक घटना
पांच साल पहले जमालपुर ब्लॉक के सिकन्दरपुर ग्राम में प्रयागराज से आए एक मजदूर के शरीर पर सोते समय कपड़ों के अंदर रात्रि में नागिन घुस गई थी। कुलबुलाहट होने पर उसकी नींद खुली। जब उसने देखा कि बनियान में नागिन है तो उसके तो होश ही उड़ गए। वह एक खंभा पकड़कर खड़ा हो गया। डर के मारे उसकी घिग्घी बंध चुकी थी। सुबह साथियों ने देखा तो सभी डर गए। डर के मारे कोई उसके पास जाने का साहस नहीं कर पा रहा था। नागिन उसे कभी भी डंस सकती थी।
इसकी सूचना तत्कालीन ग्राम प्रधान सुजीत सिंह उर्फ बिल्लू को दी गई। वह आए तो इसकी सूचना महेश सिंह को फोन पर दी। महेश सिंह आए और बहुत ही कुशलता से नागिन को वश में कर लिया। तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
महेश बाबा 32 साल से सांप पकड़ने में लगे हुए हैं। वह अब तक सात हजार से ज्यादा सांपों को पकड़कर जंगल में छोड़ चुके हैं। उनकी शिक्षा मात्र कक्षा आठ तक की है।
महेश सिंह बाबा ने बताया कि वह कोई जादू या मंत्र नहीं जानते हैं। यह एक कला और साहस है। युवावस्था में खेल खेल में सांप पकड़ने लगा था। आज निःशुल्क रूप से आम जनता की प्राण रक्षा के लिए सांपों को पकड़ते हैं। सांपों को पकड़ने के बाद चुनार व पड़ाव स्थित वन विभाग के कर्मचारियों को सौंप देते हैं।
महेश का मोबाइल नंबर 7860181617 है।
कुर्मियों की बातें : पूर्वांचल का लौह पुरुष कहा जाता है मिर्जापुर के डॉ. बलिराम सिंह को
Mon, Dec 1, 2025
राजेश पटेल, जमालपुर, मिर्जापुर।
डॉ. बलिराम सिंह अपने माता-पिता को तीर्थयात्रा कराने रामेश्वरम ले गए थे। वहीं पर उनके पिताजी ने एक सपना देखा। काश, बनारस में भी अपने समाज के रात्रि विश्राम के लिए एक स्थान होता। चूंकि सपना जागृत अवस्था में देखा था। वे बुजुर्ग हो चुके थे। इसलिए इसे साकार करने की जिम्मेदारी बेटे डॉ. बलिराम सिंह ने ली।
बनारस आते ही उसे साकार करने की कोशिशें शुरू कर दीं। आज डॉ. बलिराम सिंह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वाराणसी के तेलियाबाग में स्थित सरदार पटेल स्मारक अतिथि निवास समाज के प्रति उनके योगदार की जीवंत गवाही दे रहा है। डॉ. बलिराम सिंह मिर्जापुर जिला के जमालपुर ब्लॉक के ओड़ी गांव के निवासी थे। उनका जन्म एक किसान परिवार में जनवरी 1930 में हुआ था। पिता अशर्फी सिंह, माता का नाम अलियारी देवी था।
परिवार में संपन्नता थी। सो बनारस में भी घर पहले से ही था। लहुराबीर के चौराहे पर उनका चौधरी मेडिकल स्टोर आज भी है। डॉ. बलिराम सिंह के सुपुत्र मनोज सिंह ने बताया कि रामेश्वरम में रुकने के लिए धर्मशाला की अच्छी व्यवस्था थी। दादा जी ने ही उस समय चर्चा की थी कि हमारे जमालपुर क्षेत्र से भी काफी लोग खरीददारी करने, दवा कराने, पढ़ने या अन्य कार्य से अक्सर बनारस आते-जाते रहते हैं। रुकने की कोई व्यवस्था न होने से सभी को काफी परेशानी होती है।
उस समय सड़क व गंगा पर पुल न होने से बनारस जाने में काफी समय लग जाता था। उसी दिन लौटना भी पड़ता था। क्योंकि रात्रि विश्वाम के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसा ही धर्मशाला बनारस में भी बनना चाहिए। पिताजी की बात को डॉ. बलिराम सिंह ने गांठ बांध लिया। ठान लिया कि बनारस में भी भव्य धर्मशाला बनेगा। वहां से लौटते ही इस पर कार्य शुरू कर दिया। समाज के लोगों से सहयोग लेकर पहले तेलियाबाग में जमीन खरीदी।
1960 में सरदार पटेल स्मारक अतिथि निवास की आधारशिला रखी गई। उस समय बाबतपुर के रामखेलावन सेठ मुरब्बा वाले तथा भदावल की धनपत्ती देवी ने शिलान्यास किया था। इसके बाद धीरे-धीरे लोग आगे आते गए और कमरे बनने लगे। डॉ. बलिराम सिंह ने इसमें सभी का सहयोग लिया, जो करना चाहते थे। वह आजीवन इस संस्था के अध्यक्ष भी रहे। मंत्री बदलते रहे। सामाजिक कार्यों को देखते हुए डॉ. बलिराम सिंह को अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा का अध्यक्ष भी चुना गया। इस पद पर वह लंबे समय तक रहे। महासभा की मासिक पत्रिका कूर्म क्षत्रिय जागरण का संपादन भी डॉ. बलिराम सिंह ने लंबे समय तक किया। सिर्फ बनारस क्यों, मिर्जापुर जिला के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल विंध्याचल धाम में भी सरदार पटेल स्मारक अतिथि निवास का भव्य निर्माण इनकी ही प्रेरणा से संभव हो सका। यही कारण है कि कालांतर में डॉ. बलिराम सिंह को पूर्वांचल का लौह पुरुष कहा जाने लगा। आठ नवंबर 2020 को इस महामानव ने आखिरी सांस ली।
जिस शख्स ने इतनी बड़ी संस्था बनारस में ही नहीं मिर्जापुर के विंध्याचल भी खड़ी की, उसकी पुण्यतिथि पर संस्था के मौजूदा कर्ताधर्ता भले याद नहीं करते, लेकिन समाज नहीं भूला है।