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कुर्मी किसके ? : पूर्वांचल के कूर्मियान में वर्चस्व की जंग

Patelon ki Baaten

Mon, Jan 5, 2026

राजेश पटेल

सरदार सेना के अध्यक्ष डॉ. आरएस पटेल ने जब से जनहित संकल्प पार्टी का गठन किया है, यूपी के पूर्वांचल के कूर्मियान में वर्चस्व की जंग तेज हो गई है। कुर्मी समाज का दल कहे जाने वाले अपना दल एस में भी बेचैनी है। यह बेचैनी ज्यादा इसलिए है कि कुर्मी वोटों के लिए भाजपा धीरे-धीरे करके अपना दल एस से निर्भरता कम करने का प्रयास कर रही है। इसीलिए स्वतंत्रदेव सिंह के फेल होने के बाद केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में प्रोजेक्ट किया है।

अपना दल एस का बेस वोट कुर्मी है। मिर्जापुर, बनारस, जौनपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, फतेहपुर सहित कुछ अन्य कुर्मी बाहुल्य जिलों में मजबूती दिखती है। सत्ता में आने के लिए भाजपा को अपना दल एस और अपना दल एस को भाजपा की जरूरत है। इसलिए इन दोनों दलों के बीच गठबंधन 2014 से कायम है। बीच-बीच में भाजपा की ओर से झटका देने का प्रयास जरूर किया गया, लेकिन जब पैरों तले की खिसकती जमीन दिखी तो आंखें खुलीं भी।

अपना दल एस पर से निर्भरता खतम करने के लिए भाजपा ने पहले स्वतंत्रदेव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। स्वतंत्रदेव सिंह मूल रूप से पूर्वांचल के ही मिर्जापुर जिले के हैं। लेकिन वह अपने को कुर्मी नेता के रूप में प्रतिस्थापित कर पाने में नाकामयाब रहे। इनको टार्गेट दिया गया था पूर्वांचल से अपना दल एस के प्रभाव को कम करें, लेकिन सफल नहीं हो सके। अब यही टार्गेट संभवतः नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को भी मिला है।

इसीलिए लखनऊ से बाहर उनका पहला दौरा मिर्जापुर होने जा रहा है, आठ जनवरी को। वह पूर्व मंत्री चुनार के पूर्व विधायक कद्दावर नेता रहे ओमप्रकाश सिंह से भी मिलने उनके गांव मगरहा जाने वाले हैं। चर्चा तो यहां तक है कि मकर संक्रांति के बाद योगी मंत्रिमंडल के होने वाले विस्तार में अनुराग सिंह को मंत्री बनाया जा सकता है। इससे मिर्जापुर और बनारस दोनों में अपना दल एस पर प्रभाव पड़ना तय है। अनुराग सिंह की मां स्व. सरोज सिंह बनारस की लोकप्रिय मेयर रह चुकी हैं।

अनुराग सिंह का घर भी सीखड़ ब्लॉक के मगरहा गांव में है। वहां से उनका बनारस के कुर्मी बाहुल्य विधानसभाओं में आना-जाना भी आसान है। यदि अनुराग सिंह को मंत्री बना दिया जाता है तो मिर्जापुर में सत्ता के दो केंद्र हो जाएंगे। जाहिर है इसमें अनुराग भारी पड़ेंगे।

पते की बात यह है कि अनुप्रिया पटेल और अनुराग सिंह में 2014 से ही 36 का रिश्ता है। इसका कारण है। इसी कारण को लेकर अनुराग सिंह के पिता ओमप्रकाश सिंह को राजनीति से संन्यास भी लेना पड़ा है। दरअसल मिर्जापुर संसदीय सीट को सामान्य बनाने में अनुराग सिंह ने ही मेहनत की, यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा। पूरी तैयारी थी भारतीय जनता पार्टी से लोकसभा का चुनाव लड़ने की, लड़ते तो जीत भी जाते। लेकिन, ऐन मौके पर भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन अपना दल से हो गया और बनारस से मोदी की जीत सुनिश्चित करने के लिए मिर्जापुर संसदीय सीट अपना दल एस के कोटे में चली गई। तभी से अनुप्रिया पटेल यहां से लगातार चुनाव जीत रही हैं। सांसद न बन पाने की कसक अनुराग सिंह के मन में तो है ही, उनके पिता ओमप्रकाश सिंह भी इसे भूले नहीं हैं।

अब आते हैं जनहित संकल्प पार्टी पर। प्रदेश में कुर्मी जाति के लोगों पर जहां भी अत्याचार हो रहा है, इसके नेता पहुंच रहे हैं। न्याय के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसलिए पूर्वांचल में कुर्मी समाज का रुझान तेजी से इसकी ओर बढ़ा है। अपना दल एस तो इसके प्रभाव को कम करना ही चाहता है, भाजपा के लिए भी यह बड़ा संकट है। वैसे सबसे ज्यादा नुकसान अपना दल एस का ही है। इस नुकसान से बचने के लिए भाजपा और अपना दल एस दोनों के नेता अपने-अपने हिसाब से मंथन में जुटे हैं।

इसीलिए आगामी विस्तार में अपना दल एस भी अपनी पार्टी से एक और मंत्री चाहता है। ज्यादा संभावना है कि वह सौभाग्यशाली पूर्वी उत्तर प्रदेश का और कुर्मी विधायक ही होगा। पिछड़ों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए इस समय अपना दल एस द्वारा अखबारों की पुरानी कतरनों को भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल किया जा रहा है। कुछ लोग तो समझ ही नहीं पा रहे हैं कि यह कतरन सालभर पुरानी है, जो समझ रहे हैं, उनकी समझ में यह नहीं आ रहा है कि साल भर पुरानी कतरन क्यों वायरल की जा रही है।

राजनैतिक सूत्र बताते हैं कि भाजपा, अपना दल कमेरावादी और जनहित संकल्प पार्टी की घेराबंदी को तोड़ने के लिए यह कतरन हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा रही है। ताकि कुर्मी वोट बचा रहे।

बहरहाल अभी तक अनुप्रिया पटेल नीत अपना दल एस उन्नीस नहीं है। उसके पास अभी भी कुर्मी का बड़ा वोट बैंक है। भाजपा की हर चाल का जवाब यही है। लेकिन कुर्मी समाज को यह समझना होगा कि भाजपा चाहे जितने भी मोहरे सेट कर ले, वह हकीकत में उसका हितैषी नहीं हो सकती। हालांकि हितैषी हैं, यह दिखाने के लिए प्रयास जारी हैं। इस बीच कुर्मी समाज के तीनों दलों अपना दल एस, अपना दल कमेरावादी तथा जनहित संकल्प पार्टी के लिए बड़ी चुनौती तो भाजपा खड़ी कर रही है। देखना है कि इस चुनौती से ये तीनों दल कैसे निपटते हैं।

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